Monday, May 21, 2007

మంజిల్ - రిమ్ ఝిమ్ గిరె సావన్

रिम झिम गिरे सावन, सुलग सुलग जाये मन
भीगे आज इस मौसम में लगी कैसी ये अगन

पहले भी यु तो बरसे थे बदल
पहले भी यु तो भीगा था आँचल
अबके बरस क्यों सजन सुलग सुलग जाये मन

इस बार सावन देह्का हुआ है
इस बार मौसम बहका हुआ है
जाने पीके चली क्या पवन सुलग सुलग जाये मन

చిత్రం: మంజిల్
గానం: లత
సాహిత్యం: యోగేష్
సంగీతం: RD బర్మన్

0 వ్యాఖ్యానములు:

వ్యాఖ్యను పోస్ట్ చెయ్యండి